क्या कानून व्यवस्था में भी ai का इस्तेमाल हो रहा है?, AI in judicial system in hindi

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Artificial intelligence या कहे AI इन दिनों खूब चर्चे में है। वही भविष्य का स्वरूप ये कैसे बदल देगा, इसे लेकर भी चर्चाएं तेज है। आज हम इसकी चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष आपराधिक मामले की सुनवाई हो रही थी और जज को जमानत को लेकर फैसला लेना था। इस मामले पर फैसला देने से पहले जज ने Chat GPT का इस्तेमाल किया।

हालांकि जॅज ने Chat GPT का इस्तेमाल केवल जमानत पर एक व्यापक तस्वीर पाने के लिए किया था। साथ ही उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि उनका फैसला Chat GPT से मिली जानकारी पर आधारित नहीं है। लेकिन क्या ये पहली बार हुआ है जब भारत में जॅज ने Chat GPT का इस्तेमाल किया हो? इसका जवाब है हाँ।

हालांकि ai का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट पहले कर चुका है। आपको याद होगा कि इस साल की फरवरी महीने में महाराष्ट्र में चली राजनीतिक खींचतान का मुद्दा जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उस बहस को ट्रांसक्राइब करने के लिए ai का इस्तेमाल किया गया।

AI in judicial system in hindi

वहीं भारत सरकार अदालतों को डिजिटल बनाने के लिए E Courts प्रोजेक्ट की शुरुआत कर चुकी है, जिसके लिए 7000 करोड़ रुपए आवंटित भी किए गए हैं और अब काम तीसरे चरण या तीसरे फेस में है, जिसका एक अहम हिस्सा ai है। ऐसे में हम सबके जहन में एक ही सवाल उठता है क्या जजों की जगह ai ले सकता है?

क्या ai अब जज की जगह लेगा?

हमने यही सवाल विकास महेंद्र से पूछा जो विकास उस टीम का एक अहम हिस्सा है और साथ ही वो ai को कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए अग्रसर है, उन्होंने कहा, “क्या ऐसा हो सकता है कि आर्टिविलियेशन इंटेलीजेंस जॅज बन जाएगा और जो जॅज साहब है वो निकल जाएंगे? मेरे ख्याल में वो अभी के लिए तो नहीं हो रहा है अभी आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स जैसे कोर्ट में इस्तेमाल हो रहा है वो थोड़ा डिसीजन सपोर्ट के रूप में हो रहा है। उसे आप ऐसा इस्तेमाल कर सकते हैं कि जो बहुत इम्पोर्टेन्ट चीजें हैं वो जज साहब को वो पेश कर सकते हैं।”

Vikas Mahindra

“उदाहरण के लिए, एक केस है और उस केस में कौन कौन से जजमेंट्स कोर्ट में रेलेवेंट है कौन कौन से आर्गुमेंट हम वकीलों को लेने चाहिए, उन सबके वकील रिसर्च करते हैं। वो बहुत सारे बुक्स पढ़ते हैं, बहुत सारे ऑनलाइन जर्नल्स पढ़ते हैं। वहाँ से उन्हें पता चलता है कि कौन सा आर्गुमेंट बनाना ये करने में काफी सारा टाइम बीत जाता है। मगर आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस से आप ऐसा कर सकते हैं कि आप मॉडल्स को ट्रैन कर सकते हैं ताकि वो जो केस है उन्हें पढ़ दे और पढ़ने के बाद उस केस में क्या क्या केसेस रेलेवेंट है? उस केस में क्या क्या आर्गुमेंट्स रेलेवेंट है? वो आपको एक शॉर्टलिस्ट बनाके दे देगा। शॉर्टलिस्ट बनाने में ना काफी सारा टाइम उनका बच जाता है क्योंकि ये यूजिंग आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स टूल्स हैं।”

दूसरा सवाल ये है कि क्या ऐसे में लोग ai के अन्य टूल्स की मदद से अपना मामला खुद लड़ सकेंगे?

इसपर विकास महेंद्र ने कहा कि, “ऐसा नहीं होगा कि वकील लोगों की जरूरत कम पड़ जाएगी। वकील लोग अपनी वकालत और ज्यादा स्पेशलाइज़्ड बनाएंगे, सिंपल चीजें वो करना छोड़ देंगे और अपने आप करना शुरू करेंगे, मगर जो कॉम्प्लिकेटेड चीजें हैं, वो काफी सारा बढ़ जाएगा।”

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Ai का इस्तेमाल law system में और कहां हो रहा है?

AI helping in judicial system
AI helping in judicial system

भारत पहला देश नहीं है जो इसका इस्तेमाल कर रहा है। दुनिया के कई देशों में ai का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। उदाहरण के लिए, चीन 1990 से ai को अपनी न्यायिक प्रणाली में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। चीन अपनी अदालतों में स्मार्ट कोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। ये सिस्टम जजों को मामलों का आंकलन करने, उन्हें किन दस्तावेजों की जरूरत है, उसके बारे में बताता है। मामले से जुड़े अन्य संदर्भों के बारे में दिशा देता है। तो सवाल ये है कि भारत की न्यायिक व्यवस्था में ai का भविष्य क्या है?

फरवरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कानूनी क्षेत्र पर एक चर्चा में सर्वोच्च न्यायालय की जज जस्टिस हेमा कोली ने कहा, “आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स कानून के क्षेत्र में बहुत कुछ बदल सकता है। ये ज़िन्दगी का सच है कि ai कहीं नहीं जाने वाला और हमें समझदारी, दुरदर्शिता और सच्चे मन से इसका सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

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